50 साल से छिपाकर रखा था यह ब्रह्मास्त्र, अब दुनिया के सामने आते ही बढ़ी टेंशन
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और लगातार सैन्य टकरावों के बीच ईरान एक बार फिर वैश्विक चर्चा का केंद्र बन गया है। हाल के दिनों में सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय रक्षा हलकों में एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें ईरानी वायुसेना का एक F-14 टॉमकैट लड़ाकू विमान कथित तौर पर एक ऑपरेशनल मिशन पूरा करने के बाद रनवे पर उतरता दिखाई दे रहा है। इस वीडियो के सामने आने के बाद दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों और सैन्य विश्लेषकों के बीच नई बहस शुरू हो गई है। कई लोग इसे ईरान की सैन्य क्षमता का प्रदर्शन मान रहे हैं, जबकि कुछ विशेषज्ञ इसे रणनीतिक संदेश के रूप में देख रहे हैं।
ईरान लंबे समय से अपनी मिसाइल और ड्रोन तकनीक के लिए जाना जाता है। हाल के वर्षों में देश ने कई बार दावा किया है कि उसने प्रतिबंधों के बावजूद अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत किया है। हालांकि अब जिस हथियार प्रणाली की चर्चा हो रही है, वह आधुनिक ड्रोन या बैलिस्टिक मिसाइल नहीं, बल्कि एक ऐसा लड़ाकू विमान है जिसकी कहानी शीत युद्ध के दौर से जुड़ी हुई है। यह विमान है F-14 टॉमकैट, जिसे कभी अमेरिकी नौसेना की शान माना जाता था।
F-14 टॉमकैट का नाम सुनते ही रक्षा विशेषज्ञों के मन में 1970 और 1980 के दशक की तस्वीर उभर आती है। उस समय अमेरिका और सोवियत संघ के बीच शीत युद्ध अपने चरम पर था। अमेरिकी नौसेना को ऐसे विमान की आवश्यकता थी जो दुश्मन की लंबी दूरी की मिसाइलों और लड़ाकू विमानों को दूर से ही पहचानकर नष्ट कर सके। इसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए F-14 टॉमकैट विकसित किया गया। यह उस समय दुनिया के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में गिना जाता था और इसकी रडार क्षमता तथा लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें इसे बेहद खतरनाक बनाती थीं।
विशेषज्ञों के अनुसार F-14 केवल एक लड़ाकू विमान नहीं था, बल्कि यह अमेरिकी सैन्य शक्ति का प्रतीक भी माना जाता था। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि यह दुश्मन के विमानों और मिसाइलों को काफी दूरी से ट्रैक कर सकता था। यही कारण था कि अमेरिकी विमानवाहक पोतों की सुरक्षा में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती थी। बाद के वर्षों में अमेरिका ने F-22 और F-35 जैसे आधुनिक स्टील्थ फाइटर जेट विकसित कर लिए, लेकिन F-14 का नाम सैन्य इतिहास में हमेशा विशेष स्थान रखता है।
दिलचस्प बात यह है कि आज दुनिया में केवल ईरान ही ऐसा देश माना जाता है जिसके पास अभी भी कुछ सक्रिय F-14 टॉमकैट विमान मौजूद हैं। इसकी वजह 1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले का दौर है, जब ईरान और अमेरिका के संबंध बेहद करीबी थे। उस समय ईरान के शाह ने अमेरिकी रक्षा उद्योग से बड़ी मात्रा में हथियार खरीदे थे। इन्हीं सौदों के तहत ईरान को दर्जनों F-14 टॉमकैट विमान भी मिले थे। उस दौर में यह सौदा अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य निर्यात समझौतों में से एक माना गया था।
1979 में इस्लामिक क्रांति के बाद हालात पूरी तरह बदल गए। ईरान और अमेरिका के रिश्ते खराब हो गए और वॉशिंगटन ने तेहरान पर कड़े आर्थिक और सैन्य प्रतिबंध लगा दिए। अमेरिकी प्रशासन ने F-14 के स्पेयर पार्ट्स और तकनीकी सहायता की आपूर्ति भी रोक दी। उस समय कई पश्चिमी विश्लेषकों का मानना था कि कुछ वर्षों के भीतर ईरान के F-14 विमान बेकार हो जाएंगे क्योंकि उनके रखरखाव के लिए जरूरी पुर्जे उपलब्ध नहीं होंगे।
लेकिन घटनाक्रम उम्मीद के विपरीत रहा। ईरान ने दावा किया कि उसके इंजीनियरों और तकनीशियनों ने इन विमानों को चालू रखने के लिए स्वदेशी समाधान विकसित किए। वर्षों तक ईरानी वायुसेना ने इन विमानों का उपयोग जारी रखा और समय-समय पर इनके आधुनिकीकरण की भी खबरें सामने आती रहीं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि हमेशा संभव नहीं रही, लेकिन इतना स्पष्ट है कि ईरान ने इन विमानों को अपेक्षा से कहीं अधिक लंबे समय तक सेवा में बनाए रखा।
हाल ही में वायरल हुए वीडियो ने इसी पुराने विमानों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। वीडियो में कथित रूप से एक F-14 टॉमकैट को मिशन के बाद सुरक्षित लौटते हुए दिखाया गया है। ईरानी मीडिया और कुछ सैन्य विश्लेषकों ने इसे देश की तकनीकी क्षमता का प्रमाण बताया है। उनका कहना है कि दशकों पुराने इस विमान को सक्रिय रखना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है, खासकर तब जब उस पर लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लागू रहे हों।
हालांकि कई रक्षा विशेषज्ञ इस विषय पर अधिक संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि किसी भी सैन्य उपकरण की वास्तविक क्षमता का आकलन केवल प्रचार वीडियो के आधार पर नहीं किया जा सकता। आधुनिक युद्ध में स्टील्थ तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, उन्नत रडार और नेटवर्क आधारित ऑपरेशन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में 1970 के दशक में विकसित किसी विमान की तुलना सीधे आधुनिक पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों से करना उचित नहीं होगा।
इसके बावजूद F-14 टॉमकैट का मनोवैज्ञानिक और प्रतीकात्मक महत्व कम नहीं है। यह विमान ईरान के लिए केवल एक सैन्य संपत्ति नहीं बल्कि आत्मनिर्भरता और तकनीकी जिद का प्रतीक बन चुका है। ईरानी नेतृत्व अक्सर इसे इस बात के उदाहरण के रूप में पेश करता है कि कैसे देश ने प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद अपनी सैन्य क्षमताओं को बनाए रखा। यही कारण है कि जब भी F-14 से जुड़ा कोई वीडियो या तस्वीर सामने आती है, वह तुरंत वैश्विक सुर्खियों में आ जाती है।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच इस तरह के सैन्य संदेशों का राजनीतिक महत्व भी होता है। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान समय-समय पर अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन कर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिद्वंद्वियों को संदेश देना चाहता है। मिसाइल परीक्षण, ड्रोन प्रदर्शन और अब F-14 टॉमकैट से जुड़े वीडियो इसी रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं। इससे देश अपने समर्थकों को आत्मविश्वास और विरोधियों को चेतावनी देने का प्रयास करता है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान के पास कितने F-14 विमान पूरी तरह ऑपरेशनल स्थिति में हैं। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में इसके अलग-अलग अनुमान दिए गए हैं। लेकिन इतना जरूर है कि पांच दशक पुराने इस विमान ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। शीत युद्ध के दौर का यह लड़ाकू विमान आज भी सैन्य चर्चाओं में जगह बनाए हुए है और यही इसकी सबसे बड़ी खासियत मानी जा रही है।
आने वाले समय में यदि मध्य पूर्व की स्थिति और अधिक संवेदनशील होती है तो ईरान की वायु शक्ति और उसके पुराने लेकिन चर्चित हथियारों पर दुनिया की नजर बनी रहेगी। फिलहाल F-14 टॉमकैट का यह नया वीडियो रक्षा जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है और यह दिखाता है कि कभी-कभी दशकों पुराने हथियार भी आधुनिक भू-राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकते हैं।

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